अपयश Feb 25, 2026 निरावृत किये बगैर भला वीणा को, किसने पाया यहाँ अप्राप्य ज्योत्स्ना को। है रचना विरंचि की बड़ी विचित्र, निर्मोही, यश का आसन दुर्लभ, अपयश क्षणिक आरोही।