ह्रदय Dec 14, 2025 मै इन खेतों के सूखे की फटन में अपना हृदय गला कर भरता हूँ, भरता आया हूँ, पर जानता हूँ कि उसे पानी चाहिए, जो मैं ला नहीं सकता।